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Wednesday, March 6, 2019

होली क्यों मनाते हैं ? | about holi in hindi


होली रंगो का त्यौहार कहा जाता है , जो बसंत ऋतू में मनाया जाने वाला एक महत्पूर्ण भारतीय लोगो का त्यौहार है। इस त्यौहार को हिन्दू पंचाँग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन संगीत और ढोल के बिच एक दूसरे पर रंग और गुलाल फेका जाता है। इस त्यौहार को भी अन्य त्यौहार की तरह 'बुराई पर अच्छाई का जित माना जाता है' यह त्यौहार पारम्परिक रूप से दो दिन धूम धाम से मनाया जाता है। पहले दिन होलिका जलाई जाती है जिसे होलिका दहन कहा जाता है और दूसरे दिन लोग एक दूसरे पर रंग गुलाल फेकते हैं।

होली का इतिहास

होली भारत का अत्यंत प्राचीन त्यौहार है। हिरण्यकश्यप प्रचीन भारत का एक राजा था जो एक राक्षस के सामान था। वह भगवान विष्णु से अपने भाई का बदला लेना चाहता था जिसे भगवान विष्णु ने मारा था। इसलिए उसने अपने आप को बहुत शक्तिशाली बनाने के लिए उसने बहुत सालों तक प्राथना की और आखिर में उसे वरदान मिल गया  इससे हिरण्यकश्यप अपने आप को खुद भगवान समझने लगा था और अपनी प्रजा को अपनी पूजा करने के लिए बोलता था। और इसकी डर से सब लोग इसकी पूजा भी करते थे। इसका एक बेटा था जिसका नाम प्रह्लाद था जो भगवान विष्णु का परम् भक्त था और अपने पिता की पूजा करने से उसने साफ मना कर दिया जिससे हिरणकश्यप बहुत गुस्सा हो गया और अपने ही बेटे को मारने के लिए अपनी बहन होलिका से बोल दिया। होलिका को यह वरदान था की वह अग्नि से नहीं जलेगी और दोनों ने रणनीति बनायीं की होलिका प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाएगी उनकी योजना प्रह्लाद को जलाने की थी लेकिन उनकी योजना सफल नहीं हो सकी क्योंकि प्रह्लाद सारा समय भगवान विष्णु का नाम लेता रहा और बच गया पर होलिका जलकर  राख हो गयी। होलिका की ये हार बुराई पर अच्छाई का जित है। इसके बाद भगवान विष्णु ने हिरण्कश्यप का वध कर दिया। इसके चलते भारत के कुछ राज्यों में होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। 


होली रंग का भाग कैसे बनी ? 

ऐसा माना जाता है की भगवान विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण होली रंगो से मानते थे। इसलिए होली का त्यौहार रंगो के रुप में विख्यात हुआ। भगवान कृष्ण गोकुल और वृन्दावन में अपने साथियों के साथ होली मनाते थे। वे और उनके साथी होली के दिन मजाक भरी शैतानियां करते थे इसलिए आज भी वृन्दावन और गोकुल जैसी होली कही नहीं मनाई जाती है। 
* पहले होली के रंग टेसू या पलाश के फूल से बनाया जाता था। वो त्वचा के लिए बहुत अच्छे माने जाते थे। लेकिन आज के समय में इसकी परिभाषा ही बदल गयी है आज लोग होली खेलने के लिए रसायन वाले रंग का उपयोग करते है जो हमारी त्वचा के लिए बहुत ही हानिकारक होते हैं इसके चलते बहुत से लोगो ने रंग या होली खेलना ही छोड़ दिए हैं। 

होली समारोह 

होली एक दिन का त्यौहार नहीं है यह कई राज्यों में 3 दिन तक मनाया जाता है 

Day 1 - पूर्णिमा के दिन रंगो को एक थाली में सजाया जाता है और परिवार के सबसे बड़े सदस्य या परिवार के मुखिया बाकि पतिवार के लोगो पर रंग छिड़कते हैं।

Day 2 - इस दिन होलिका दहन करते है  और अग्नि देवता के आशीर्वाद के लिए माँ अपने बच्चो के साथ जलती हई होलिका की पांच चक्कर लगाती हैं। 

Day 3 - इस दिन को मेन पर्व कहते है यह होली उत्सव का अंतिम दिन होता है इस दिन लोग एक दूसरे को रंग गुलाल लगाते है। 



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